अब तंबाकू और सिगरेट बेचने से पहले लेना होगा, लाईसेंस

उत्तर प्रदेश सरकार की बड़ा फैसला, तंबाकू उत्पाद बेचने के लिए लेना होगा।

हमारे देश की सरकार हो या राज्य की, सबकी नीयत एक जैसी होती है, बिल्कुल इस तस्वीर की तरह। इस तस्वीर को ध्यान से देखिये तो आपको साफ-साफ दिखाई देगा कि जो व्यक्ति नो स्मोकिंग की साईन बोर्ड लगा रहा है उसी के मुंह सिगरेट की चुस्की ले रहा है। बिल्कुल हमारी सरकारी की तरह है। सरकार के एक आर्टिकल 47 नशाबंदी का निर्देश देता है और दिल्ली में होम डिलीवरी शुरू हो रही है। सरकार केवल बाबा साहब, गांधी जी और लोहिया जी का ही अपमान नहीं कर रहे हैं बल्कि संविधान की भी धज्जियां उड़ा रहे हैं।

एक विभाग शराब की फैक्ट्री खुलवाता है दूसरा बीयर बार – मॉडल शाप खुलवाता है तीसरा अप्रत्यक्ष रूप से प्रचार प्रसार करता है चौथा बीयर बार और ठेकों से वसूली करता है पांचवा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताता है आर्टिकल 47 भारत को नशा मुक्त शराब मुक्त बनाने का निर्देश देता है। जितनी बेटियां तीन तलाक से परेशान थी उससे हजार गुना ज्यादा शराब से परेशान हैं शराब से सनातन संस्कृति समाप्त हो रही है लेकिन आर्टिकल 47 लागू करने पर सन्नाटा बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपैया। देश बड़ा न मैया, सबसे बड़ा रुपैया।।

गांधी जी पूरे देश में शराबबंदी चाहते थे बाबा साहब पूरे देश में नशाबंदी चाहते थे लोहिया जी पूरे देश में शराबबंदी चाहते थे आर्टिकल 47 शराबबंदी का निर्देश देता है शराब पीने के कारण अमर बर्बाद हो रहा है और उसी पैसे से अकबर के 16 बच्चे मुफ्त में पल रहा है। दिल्ली के गांधीवादी सरकार ने शराब के लिए होम डिलीवरी शुरु कर दिया है, ऊधर छतीसगढ़ की सरकार ने भी होम डिलीवरी चालू किया हुआ है। कोरोना काल में सबसे पहले जो दुकान खोला गया वह शराब का था क्योंकि यह हमारे समाज के लिए अतिआवश्यक संजीवनी है का काम करता है, भले ही आक्सीजन नही मिलने से लोगों नें जान गवा दिया हो लेकिन शराब की पूर्ति पूरी की गयी।

तंबाकू (Tobacco) की बढ़ती समस्या और जनस्वास्थ्य को इससे हो सकने वाले खतरे का ख्याल रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार (UP Government) ने फैसला किया है कि राज्य में सिर्फ उन्हीं विक्रेताओं को तंबाकू, सिगरेट और संबद्ध उत्पाद बेचने की इजाजत होगी जो इसके लिए नगर निगम से लाइसेंस लेंगे. अब यह लाईसेंस फ्रि में मिलेगा या इसके लिए कुछ देना लेना होगा यह बात साफ नही किया गया। खैर हम सभी जानते है बिना लिये दिेये तो कुछ होता ही नही। योगी जी का फरमान और नगर निगम वालों का काम बोलता है।

वालंट्री हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया उत्तर प्रदेश सरकार के इस कदम का स्वागत करता है. राज्य में तंबाकू की बिक्री के नियमन के लिए तंबाकू विक्रेताओं के लिए लाइसेंसिंग को आवश्यक बना दिया गया है. तंबाकू उत्पादों तक पहुंच का नियमन करने के लिए तंबाकू विक्रेताओं के लिए लाइसेंसिंग महत्वपूर्ण है.


देश के लोगों को तंबाकू जैसे लती उत्पादों से होने वाली जीवनभर की पीड़ा से बचाने के लिए तंबाकू तक पहुंच का नियमन आवश्यक है और यह बेचने वालों के लिए लाइसेंसिंग को अनिवार्य किए बिना संभव नहीं है.। खैर यह भी सरकार के लिए एक उगाही का नया रास्ता साबित होगा। सबसे ज्यादा लोग तो शराब पीने से परेशान है और उसे सरकार लाईसेंस दिया हुआ है समाज को मौत बेचने के लिए। जितना मुस्लिम बेटियाँ तीन तलाक से परेशान नही है उससे ज्यादा तो हिंदू बेटियाँ इस शराब के कारण आत्म हत्या कर लेती है। लेकिन सरकार का क्या चित भी अपना और पट भी अपना है।

लेकिन अब सिगरेट, बीड़ी, खैनी आदि बेचने वाले विक्रेताओं के लिए लाइसेंसिंग जरूरी करने से तंबाकू नियंत्रण के लिए लागू नियमों और नीतियों का प्रभावी प्रवर्तन शुरू होगा.

सरकार का बड़ा फैसला
इस आदेश से राज्य के लोगों को तंबाकू के नुकसान से बचाने में सहायता मिलेगी और इससे महत्वपूर्ण होगा कि बच्चों के लिए तंबाकू उत्पादों को देखना और खरीदने का मौका निकालना मुश्किल हो जाएगा. मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि दूसरे राज्य उत्तर प्रदेश द्वारा स्थापित मजबूत मिसाल का पालन करेंगे और लोगों, खासकर बच्चों की तंबाकू से रक्षा करेंगे. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को एक एडवाइजरी लेटर भेजकर तंबाकू विक्रेताओं की लाइसेंसिंग नगर निगम से कराने की सिफारिश की है.इसमें कहा गया है कि लाइसेंस में यह शर्त / प्रावधान शामिल करना उपयुक्त होगा कि तंबाकू उत्पाद बेचने वाली दुकानें गैर तंबाकू उत्पाद जैसे टॉफी, कैन्डी, चिप्स, बिस्कुट, शीतल पेयर आदि नहीं बेच पाएंगी. इनमें खासतौर से ऐसी चीजें हैं जो तंबाकू का उपयोग करने वालों के लिए नहीं हो और खासतौर से बच्चों के लिए हो. केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने भी भविष्य की पीढ़ी की रक्षा के लिए ऐसी ही एडवाइजरी सभी राज्यों के प्रमुख सचिवों को भेजी है और तंबाकू उत्पाद बेचने वाली ज्यादा दुकानें खोलना हतोत्साहित करने के लिए कहा है. भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा करवाए गए ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 35.5% वयस्क (15 साल और ऊपर) किसी न किसी रूप में तंबाकू का उपयोग करते हैं. तंबाकू के उपयोग के कारण होने वाली बीमारी की कुल प्रत्यक्ष और परोक्ष लागत 182,000 करोड़ रुपए है जो देश के सकल घरेलू उत्पाद का करीब 1.8% है.

जब सरकार के बजत का इतना पैसा इस पर खर्चा हो रहा है तो क्या सरकार यह कदम नही उठा सकती है कि इन तंबाकू उत्पादक कंपनी को बंद कर दे। क्या इस तरह के फैसले से सरकार तंबाकू उत्पाद पर रोक लगा पायेगी। क्योंकि कई आदेश तो पहले ही इस तरह के दिये गये है। कोरोना काल में वैक्सीन लगवाने वालों को डाक्टर का सख्त एडवाइजरी है कि शराब धुम्रपान न करे। लेकिन क्या इस बात क्या आम जनता पर कोई फर्क पड़ा है, क्या यह उचित था कि कोई भी सरकार इस समय में शराब की होम डिलीवरी करवाये।

इस विडियों पर कमेंट करके अपनी राय जरूर दे। अगर आप चाहते है कि देश में पूर्णत: नशाबंदी लागू किया जाना चाहिए तो लाईक एंड सब्स्क्राईब करे और ज्यादा से ज्यादा फारवर्ड करे।

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